Wednesday, 18 December 2013

ख़ुशी का मोल

हमारी ख़ुशी  का मोल भी नहीं समझ सके ,
वो मेरे ग़म से ताल्लुक ना  रखने वाले  !!

Wednesday, 16 October 2013

कल आज और कल !!



कल आज और कल
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वो कल था ..
तुम भी कल हो ..
पर मैं ? ..
               मैं आज हूँ ..
और आज ही रहूंगी ..

उस से  आगे ..
पर तुमसे .. तुमसे  पीछे  !!!






Monday, 23 September 2013

और फिर … " सुबह हो गई !!! "


रात के ख्वाब ने ,
पलकों का अंजुमन 
छोड़ा नहीं  … 
                                   और उन में तुमने , 
                                     मेरा आँचल , 
                                 छोड़ा  नहीं … 


तेरी टकटकी ने , 
एक बार भी ,
पलकें उठाने की मोहलत  न दी  ….

                       
                        और फिर  … "  सुबह हो गई  !!!  " 
 





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on a different note 


रात का नशा अभी आँख से  गया नहीं

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आँखों में कल रात का  बचा हुआ काजल .…
 बाक़ी रह गई नींद 
कुछ अधूरे ख्वाब 
बासी ख़याल 
अनबूझे सवाल 
कुछ मद्धम चलती हुई सांस 
                  --- सब शिकायतें करते हैं मुझ से, 
                        अधूरेपन की . . 
तब मैं कहती हूँ  उन सब से --  " उसे आने दो !!!  "

 


Tuesday, 17 September 2013

रात भी , चाँद भी , हम - दोनों भी !!!

कुछ यूँ ही,  छुप  कर , 
उन  झरोखों से , तुम हमें देखा किए । 
तुम बिन हम कम जिए , 
तो तुम भी तो तड़पा किए …. 

तसव्वुर की चाहत , 
कुछ यूँ दबी रह गयी । 
कोई काफिया ग़ज़ल में ,
मुक़म्मल ना  हो पाया जैसे  …. 

रात भी , चाँद भी , 
हम - दोनों भी ,
चलते रहे , जलते रहे  …. 
अधूरे ही  !!!

हवाओं के ये हसीन , 
सर्द झोंके … 
जाएं यादों के उस जहाँ में , 
मुझे ले  के  … 

जिस मोड़ पे ,
 अधूरी सी , एक कहानी है  …. 
वो जो इनकार की हक़ीक़त  , 
तुम्हें बतानी है  !!!! 

Monday, 19 August 2013

" बातें "

पास आए तो अब ये मालूम हुआ    
दोस्त  -- दूर जब हम थे , 
तो  'बातें ' क्या खूब होती थीं …. 
 

Thursday, 1 August 2013

हिज्र का समां


हिज्र का समां,  फिजाओं में है … 
आज सेहेर से ही अश्क निगाहों में है … 


तुझसे ज्यादा  'खुद' से बिछड़ने  का ग़म  है । 
अगर  मिल  पाते तो खुशियों को भी हमसे रश्क होती … 


यूँ  तो चलते रहना ज़िन्दगी की फितरत है लेकिन । 
दोस्त तुम  'साथ ' होते तो … 
 बात        कुछ और होती  !!!



hijr (separation) ka sama fizaon me hai..
aaj sahar ( morning) se ashq nigahon me hain..

tujhse jyada khud se bichadne ka gam hai..

mil pate toh khushiyon ko b humse rashk (envy) hoti..
...
yun toh chalte rehna zindagi ki fitrat hai..
par dost tum sath hote , toh baat -------
kuch aur hoti ..

Sunday, 3 March 2013

गुमसुम दिल ।।।




आज तक जो दिल कहता रहा ,
करते गए ..
गज़ब तो तब हुई ..
जब दिल ने कुछ भी कहना ही छोड़ दिया ..


अब करें भी तो क्या ????

अपने ही अक्स में


ढूंढता रहा तेरे निशान ,
 दर बदर , हर एक शख्स में ...

सबसे करीब से ..
तुझे देख पाया ..

अपने ही अक्स में ...